नहीं था कहानी का मेरी कोई अंत,
जो सन्नाटा ही फैल गया हर और|☹️
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मेरे पापा
मेरा अभिमान-स्वाभिमान है पापा, मेरा जमीन-आसमान है पापा, मेरे जीवन का मेज़बान है पापा, जन्म दिया माँ ने पर पहचान है पापा, पैरों पर खड़ा ...
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किसी मोड़ पर अगर कहीं मिल जाओ तो घबराना मत, आँखे मत चुराना! मैं तुमसे नहीं पूछूंगा कि तुम कैसी हो?तुम्हे चेहरे पर कोई झूठी मुस्कान का बोझ रख ...
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मेरा अभिमान-स्वाभिमान है पापा, मेरा जमीन-आसमान है पापा, मेरे जीवन का मेज़बान है पापा, जन्म दिया माँ ने पर पहचान है पापा, पैरों पर खड़ा ...
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एक रजाई के सहारे हमने पूरी सर्दी निकाल दी ऐ गालिब, और तुम कहते हो कि हमे एक चीज़ रास नहीं आती😂
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